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| Laxmi Mittal |
हेल्लो दोस्तों,
आज में आपके साथ शेयर करने जा रहा हूँ एक राजस्थानी लड़के की कहानी ... की कैसे उसने फर्श से अर्श तक का सफ़र तय किया... और विश्व की सबसे बड़ी स्टील कम्पनी बनाने का गौरव हासिल किया !
"मैं संसार की
सबसे बड़ी नही, बल्कि सबसे लाभदायक स्टील कम्पनी चलाना
चाहता हूँ !"
- लक्ष्मी
मित्तल
Laxmi Mittal Biography in Hindi
सबसे बड़ी कंपनी : आर्सेलोरमित्तल संसार
की सबसे बड़ी कंपनी है जिसका मुख्यालय लक्जेम्बर्ग में है इस कंपनी की स्थापना 2006
में हुई, जब मित्तल स्टील ने 34 अरब डॉलर में
आर्सेलोर का अधिग्रहण किया और दोनों का विलय हुआ | लक्ष्मी मित्तल इसके
चेयरमैन और सीईओ है 2001 में इसकी आमदनी 83.443 अरब डॉलर थी और
मुनाफ़ा 2.916 अरब डॉलर ! यह विश्वव्यापी कंपनी 60
देशो में सक्रीय है और इसमें 2,61,000 कर्मचारी काम करते है
i मित्तल की कंपनी को संसार की सर्वश्रेष्ठ स्टील कंपनी
कहा जाता है आर्सेलोरमित्तल का मुख्यालय भले ही लक्जेम्बर्ग में
हो, लेकिन जैसा लक्ष्मी मित्तल के बेटे आदित्य का कहना है,
'शक्ति तो लंदन में है,' जहाँ लक्ष्मी मित्तल
रहते है !
21 वे सबसे
अमीर व्यक्ति : नाम मात्र
की पूंजी से कारोबार शुरु करने वाले लक्ष्मी मित्तल ने ऐसा क्या किया की आज उनके
पास 20.7 अरब डॉलर
की सम्पत्ति है और अमीरों की सूचि में उनका नाम 21 वे स्थान पर आता है? उनकी सफलता के मंत्र क्या है ? एक छोटी
सी स्टील मिल की शुरुआत करके वे
संसार की सबसे बड़ी स्टील कंपनी बनाने में कैसे कामयाब हुए ?
बचपन के
सबक : लक्ष्मी मित्तल
का जन्म 1950 में भारत
के पश्चिम राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में हुआ था | तपती धुप, बंजर जमीन | वे एक ऐसे गाँव में पैदा हुए थे, जहाँ बिजली भी नहीं थी |इतने विपरीत परिवेश में पैदा होने का
लाभ मिला | उन्होंने
परिस्थितियों से संघर्ष सिख लिया |उन्होंने लगन तथा विपरीत परिस्थितियों
में विचलित न होने का सबक सिख लिया | यह सबक बाद में बड़ा काम आया, क्यों की कारोबार के दौरान उनके सामने
बहुत सी विपरीत परिस्थितियां आई | जब वे सेट ज़ेवियर कॉलेज में पढ़ते थे, तो वे सुबह कॉलेज जाते थे और दिन में
अपने परिवार की छोटी सी स्टील मिल संभालते थे | दिन भर कड़ी मेहनत के बावजूद वे थकान
महसूस नही करते थे |बल्कि
स्टील व्यवसाय की बारीकियो के बारे में सोचते रहते थे | तब कौन जानता था की आगे चलकर वे संसार की
सबसे बड़ी स्टील कंपनी स्थापित करने वाले है |
नायाब विचार : लक्ष्मी मित्तल के
पिता स्टील व्यवसाय में थे | एक दिन पिता -पुत्र में मतभेद हो गया और लक्ष्मी मित्तल ने अकेले कुछ करने
की ठानी | उनके पास ख़ास पूंजी नहीं थी, लेकिन तेज दिमाग था
उनके दिमाग में विचार आया की नई स्टील मिल बनाने में बहुत खर्च आएगा, इसलिए क्यों न कोई
बीमार मिल खरीदी जाए और उसका कायाकल्प किया जाए | भावी संभावनाओ को
भांपते हुए वे इस नतीजे पर पहुचें कि नई स्टील मिल बनाने में पैसे भी अधिक लगते है
और समय भी | इसलिए अगर वे अपनी सारी ऊर्जा बीमार
स्टील मिलो को खरीदकर उन्हें लाभदायक बनाने पर केंद्रित करे, तो इससे उन्हें बहुत
फायदा हो सकता है | और इस विचार के दम पर आगे चलकर वे
स्टील किंग बन गए |
कंपनी की स्थापना : लक्ष्मी मित्तल भारत
में पैदा हुए, भारत में पढ़े, लेकिन उन्होंने अपना
फौलादी कैरियर भारत में शुरु नहीं किया | यह काम उन्होंने इंडोनेसिया
में किया जहाँ उन्होंने 1976 में 26 वर्ष की उम्र में इस्पात इंटरनेशनल कम्पनी की स्थापना की और पहला स्टील
प्लांट लगाया 1989 में उन्होंने त्रिनिनाद में काम शुरु किया, जिससे उनकी कम्पनी
अंतराष्ट्रीय कम्पनी बन गई | 2004 में इसका विलय
मित्तल की अन्य कम्पनियों में हुआ और मित्तल स्टील कम्पनी का गठन हुआ | मित्तल स्टील कम्पनी
के आर्सेलोर में विलय के बाद गठित आर्सेलोर मित्तल विश्व की सबसे बड़ी स्टील कम्पनी
है और अकेले ही संसार के 10 प्रतिशत स्टील कम्पनी का उत्पादन करती है |
शुरूआती संघर्ष : लक्ष्मी मित्तल ने
कहा है, 'हर व्यक्ति के सामने
मुश्किल दौर आते है | आपके संकल्प और समर्पण का इम्तहान तो
यह है की आप उनका किस तरह सामना करते है और उसके बाद कैसे बाहर निकलते है |' उन्होंने 1976 में स्टील प्लांट तो
डाल लिया, लेकिन वे संतुष्ट नहीं हुए | वे तो स्वयं को
अंतराष्ट्रीय स्थर पर स्थापित करना चाहते थे | मित्तल को इस क्षेत्र
में पहली बड़ी सफलता 1989 में मिली, जब उन्होंने त्रिनिदाद में एक बीमार स्टील मिल को खरीदा, जिसमें 1 मिलियन
डॉलर का नुकसान हो रहा था ! उन्होंने एक करोड़ डॉलर का निवेश किया और आधुनिक मशीनों
से उत्पादन शुरु करवाया | एक साल के भीतर ही इस मील का उत्पादन दोगुना हो गया और यह मुनाफ़ा कमाने लगी
| इस तरह हम देखते है की मित्तल ने मुश्किलों
को अवसरों में बदलने की कला थी वे संघर्ष को विजय में बदलने का तरीका जानते थे और
उन्होंने ये कमाल कई बार दिखाया !
Laxmi Mittal Biography in Hindi
महत्वपूर्ण मोड़ : अंतराष्टीय स्तर पर
बड़े खिलाडी बनने के लिए लक्ष्मी मित्तल ने कनाडा और जर्मनी की स्टील कंपनियों को
खरीदा | फिर कजाकिस्तान की और मुड़े और वहां 400 मिलियन डोलर में
कार्मेट स्टील वर्क्स खरीद ली ! इस एक निवेश ने उन्हें अंतराष्ट्रीय स्तर पर
पहुंचा दिया | 1992 में मित्तल ने मेक्सिको की तीसरी सबसे बड़ी स्टील मील
सिबाल्सा को 22 करोड़ डॉलर्स में खरीदा | उल्लेखनीय है की
मेक्सिकन सरकार ने इस मील को दस साल पहले 2 अरब डॉलर में बनाया
था, लेकिन दस साल के भीतर ही यह असाध्य रूप से बीमार दिखने लगी | और इस मित्तल ने इसे
ठीक करने का बीड़ा उठाया ! और जल्द ही इसका उत्पादन कई गुना बडा दिया ! बीमार मिलो
को सस्ते में खरीद कर उन्हें मुनाफे में लोटने की नीति मित्तल के बड़े काम आई और
यही उनकी कामयाबी का राज भी है !
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आइये जानते है लक्ष्मी मित्तल के सफलता के वह मंत्र जिनसे उनको सफलता
हासिल हुई ...
1. नए तरीके से काम
करें : साधारण कामों से
साधारण सफलता मिलती है यदि आप असाधारण कामयाबी चाहते हैं, तो आपको असाधारण काम करना
होगा। लक्ष्मी मित्तल ने भी असाधारण काम किया, नए तरीके से काम
किया, लीक से हटकर चलें। इसी का नतीजा है की आज संसार में उनके नाम का डंका बज
रहा है। मित्तल बीमार और घाटे में चल रही स्टील मिलों को खरीदते हैं, जिन्हें कोई दुसरा
खरीदने को तैयार नहीं होता। जाहिर है, वे उन्हें बहुत
सस्ते दामों पर मिल जाती है। फिर मित्तल उन मिलों का कायाकल्प करते हैं। वे
उत्पादन की लागत फौरन कम करते हैं, कर्मचारियों की
संख्या घटाते हैं। और आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करते हैं उनकी तीव्र सफलता का
रहस्य यह भी है कि, उन्होंने नई मिलें बनाने के
बजाय बीमार मिलों के कायाकल्प पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे समय भी बचा और
पूंजी भी। इसलिए आज मित्तल की कंपनी को 'दुनिया की
सर्वश्रेष्ठ स्टील कंपनी' कहा जाता है।
Laxmi Mittal Biography in Hindi
2. एक चीज पर पूरा
ध्यान केंद्रित करे : “एकै साधे सब सधे, सब साधे सब जाए।' पूरी एकाग्रता से एक
ही चीज पर ध्यान केंद्रित करेंगे, तो सफलता की संभावना बढ़ जाती है । लक्ष्मी
मित्तल ने जीवन में यही किया है। उन्होंने अपना पूरा ध्यान स्टील पर केंद्रित
किया। पिछले दो दशकों से लक्ष्मी मित्तल ने लगभग हर साल एक स्टील मिल का अधिग्रहण
करने की नीति अपनाई हैं। एक साल में वे उसे पटरी पर ले आते हैं और अगले साल
अगली मिल खरीदकर उसे बेहतर बनाने में जुट जाते है । इस तरह वे स्टिल के क्षेत्र
में लगातार प्रगति करते जा रहे हैं । ध्यान रहे, उन्होंने मेटल किंग
बनने के बारे में नहीं सोचा बल्कि स्टील, किंग बनने के बारे
में सोचा। यही वजह है की वे अपने चुने हुए क्षेत्र में कामयाब हुए और सचमुच स्टील
किंग बन गए।
3. बड़े सपने देखें : लक्ष्मी मित्तल ने
शुरुआत से ही अंतर्राष्ट्रीय कंपनी बनाने का सपना देखा था। वे संसार कि सबसे
लाभदायक कंपनी बनाने चाहते थे । उनके सपने ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित
किया। जब उन्होंने 1976 में अपना पहला स्टील प्लांट खोला, तो उन्होंने यह नहीं
सोचा कि अब इसी तक सीमित रहना है । उन्होंने तो इसे पायदान की पहली सीढ़ी माना। उनका लक्ष्य स्पष्ट
था, उनका सपना बड़ा था, इसीलिए वे आगे प्रयास करते गए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्टील प्लांट
खरीदने गए। जाहिर है, यह मेहनत का काम है, लेकिन बड़े सपने इंसान को मेहनत करने की प्रेरणा देते हैं। लक्ष्मी मित्तल
ने कहा है, 'मेहनत निश्चित रूप से काफी दूर तक ले जाती है। आजकल बहुत से लोग कड़ी मेहनत
करते हैं, इसलिए आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आप उनसे भी अधिक कड़ी मेहनत करें और अपने काम
तथा लक्ष्य के प्रति खुद को सचमुच समर्पित कर दें।'
4. अवसरों की तलाश करें
: अवसर अचानक आकर आपकी चौखट पर खड़े नहीं हो जाते। उन्हें तो पैनी नजरों से भांपना
पड़ता है। और जैसे ही वे नजर आएं, उन्हें पकड़ना होता है। तभी आप अवसरों को भुना सकते हैं, मित्तल में अवसर, भांपने की अद्भुत
क्षमता है। इसका एक उदाहरण देखें । 2004 में कजाकिस्तान के
स्टील प्लांट से मित्तल को एक तिहाई मुनाफा़ हो रहा था। जब मित्तल ने इस सरकारी
प्लांट को खरीदा था, तब इसमें 70,000 कर्मचारी थे और बेचने के लिए
सरकार कि एक शर्त यह थी कि मित्तल कर्मचारियों की संख्या कम नहीं कर सकते। मित्तल
जानते थे कि कर्मचारियों की छंटनी किए बिना प्लांट को लाभदायक बनाना मुश्किल है।
लेकिन विश्लेषकों के बाद मित्तल को अवसर दिख गया और उन्होंने सरकार की शर्त मानकर प्लांट खरीद लिया।
मित्तल ने देखा कि उनके प्लांट की जमीन पर कोयले के विशाल भंडार है और कजा़किस्तान
से चीन की सीमा लगी हुई है, जहां कोयले की भारी कमी है। मित्तल ने चीन को भारी मात्रा में कोयला बेचा
और अतिरिक्त कर्मचारियों का भरपूर उपयोग किया। अवसरों के बारे में मित्तल का कहना
है, 'हमेशा बॉक्स के बाहर सोचे और सामने आने वाले अवसरों को लपक ले, चाहे वे जो भी हों।'
Laxmi Mittal Biography in Hindi
5.
आधुनिक मशीनें लगाए : अगर आप आगे बढ़ना
चाहते हैं। तो आधुनिक मशीने आपकी मदद कर सकती है । इनसे उत्पादन बढ़ता है, लागत कम होती है और
कर्मचारियों की संख्या भी कम होती है। मित्तल की सफलता का सबसे बड़ा कारण यह है की
वे पारंपारिक ब्लास्ट फर्नेस के बजाएं मिनी मिल्स नामक अधिक प्रभावी तकनीक
पर भरोसा करते हैं। आधुनिक मशीनों और प्रभावी मैनेजमेंट तकनीकों का इस्तेमाल करके
ही मित्तल बीमार मिलों को स्वस्थ करने का काम करते हैं। मित्तल आधुनिकीकरण करके
पुरानी मिलों को आधुनिक मिलों में बदल लिया और वह भी काफी सस्ते में। कोई हैरानी
नहीं की आज वे इतने सफल हैं।
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