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| xi jinping and modi |
लेकिन क्या पाकिस्तान से भी चीन की तरह सस्ती चीजें भारत में बिकनी शुरू हो जाये..जिससे हर किसी के चार पैसे बचने लगे तो ये राष्ट्रवाद जारी रहेगा ? नही रहेगा..क्योंकि हम अपने फायदे के लिये देश की छाती पर वार करने से नही चुकेंगे. आँख बंद कर लेंगे पाकिस्तान की हरकतों से, भूल जायेंगे सैनिको की शहादत क्योंकि हम एक लालची कौम है. हम जापानी नही..हम भारतीय है वो भारतीय जहाँ हर व्यक्तिग राजनीति करता है, हर बंदा बनिया है.अपना व्यक्तिगत नफा-नुकसान अच्छे से समझता है. !
हम चीन के सामान के साथ यही कर रहे है. हम जानते है कि पाकिस्तान से बड़ा दूश्मन चीन है. पाकिस्तान को पालने वाला चीन है. दूनिया के हर मंच पर भारत का विरोध करनेवाला चीन है. संयुक्त राष्ट्र से लेकर NSG तक भारत का रास्ता रोकने वाला चीन है... फिर भी हम आँख बंद करके चीनी माल खरिदते है. हर मौके पर, हर जरूरत पर, हर त्यौहार में.
ना तो हमारे यहाँ के व्यापारियों में देश प्रेम है कि वो चीन से सामान लाने के बजाये..देशी माल बेचे या ताइवान या और किसी देश से सस्ता खरिदने की कोशिश करें. उनके लिये पैसा ..मुनाफा सबसे ऊपर है..देश जाये गड्ढे में. और ना ही हम खरिददारों में इतनी अकल है कि हम उस चीन के माल को ना खरिदें जो हमारे देश का मतलब हमारा दूश्मन है. जिसने हर उस रास्ते पर काँटे बोये है जहाँ से हम आगे बढ़ना चाहते है. अगर चीन की मनमानी ना होती, वीटो ना होता तो भारत संयुक्त राष्ट्र का स्थायी सदस्य होता तब ना कश्मीर का रोना होता ना पाकिस्तान का ये रोज का ड्रामा... लेकिन नही हमें उससे कोई मतलब नही है..हम तो चीनी सामान खरिदेंगे.. पैसे बचायेंगे..देश जाये भाड़ में....
सरकार ये खुलकर नही कह सकती की चीनी माल मत मंगवाओ या मत बेचो या मत खरिदो. हमें भी दूनियाभर में सामान बेचना है और खरिदना है. WTO की कुछ शर्ते है, मुक्त व्यापार के कुछ नियम-कायदे है वो भारत सरकार को भी मानने है. पिछले साल दिपावली पर प्रधानमंत्री मोदीजी ने 'मन की बात' में अपने यहाँ के कुम्हारों से दिये खरिदने की अपील की थी..समझदारों के लिये ईशारा ही काफी होता है लेकिन फिर भी बाजार चीनी माल से पटे थे और लोग जमकर खरिद रहे थे.
दरअसल हम भारतीयों में राष्ट्रवाद जैसी कोई चीज है ही नही जो जापानीयों में है. हम सिर्फ अच्छे व्यापारी और अच्छे ग्राहक है. खरिदते रहिये चीनी माल.. सबको राष्ट्रवाद मुबारक.
Post By: Ashish Retarekar

1 Comments
dhanyawad harshvardhan ji
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